the house – the only one in the entire valley in hindi meaning a letter to god in hindi class 10

By   December 22, 2020

a letter to god in hindi class 10 the house – the only one in the entire valley in hindi meaning एक पत्र परमात्मा को कहानी का अर्थ पूरा हिंदी में पढ़े |

the house – the only . . . . . . . . . . . hungry this year paragraph meaning translate in hindi :
अनुवाद : वह घर – सम्पूर्ण घाटी में एकमात्र – एक नीची घाटी के शिखर पर अवस्थित था। इस ऊँचाई से एक व्यक्ति नदी को तथा पकी फसल के खेत को जिसमें बिन्दुओं की तरह फूल उगे हुए थे जो सर्वदा एक अच्छी फसल होने का संकेत देते थे , को देख सकता था। एकमात्र चीज जिसकी जमीन को आवश्यकता थी वह एक भारी वर्षा अथवा कम से कम एक बौछार थी। पूरे प्रातः काल लेन्चो – जो अपने खेतों को घनिष्ठता से जानता था – ने उत्तर पूर्व आकाश की तरफ देखने के सिवाय अन्य कुछ नहीं किया था।
अब हम वास्तव में ही कुछ पानी प्राप्त करने जा रहे है , महिला। (अर्थात , अब वास्तविकता में ही वर्षा होने वाली है , प्रिय)
महिला जो रात्री भोजन तैयार कर रही थी , ने उत्तर दिया , “हाँ” भगवान चाहे तो। बड़े खेतों में कार्य कर रहे थे जबकि छोटे वाले घर के पास खेल रहे थे , जब तक कि महिला ने उन सबको नहीं पुकारा , रात्रि भोजन के लिए आ जाओ। यह भोजन के दौरान था , जैसी कि लेंचो ने भविष्यवाणी की थी , वर्षा की बड़ी बूँदें गिरना आरम्भ हो गयी। उत्तर पूर्व में मेघों के विशाल पर्वतों को आते देखा जा सकता था। वायु स्वच्छ और मधुर थी। वह पुरुष किसी अन्य कारण से बाहर नहीं गया था बल्कि अपने शरीर पर वर्षा के आनन्द की अनुभूति प्राप्त करने गया था तथा जब वह लौटा उसने भावावेश में कहा , “ये आकाश से वर्षा की बूंदे नहीं गिर रही है , वे नए सिक्के है। बड़ी बुँदे दस सेंट के सिक्के है तथा छोटी वाली पाँच के है। “
एक सन्तोषप्रद मुद्रा के साथ उसने पकी , फसल के खेत को अपने फूलों के साथ , वर्षा के एक परदे में लिपटे देखा लेकिन अचानक ही एक शक्तिशाली पवन ने चलना आरम्भ कर दिया तथा वर्षा के साथ साथ बहुत बड़े ओले गिरने आरम्भ हो गए। ये सचमुच में ही नए चाँदी के सिक्को से अवश्य मेल खाते थे। लडके , अपने को अनावृत करते हुए वर्षा में , जमे हुए मोतियों (ओलों) को एकत्रित करने बाहर दौड़ पड़े।
अब वास्तव में मौसम ख़राब हो रहा है , उस आदमी ने चिंता से कहा , मैं आशा करता हु कि यह शीघ्र ही समाप्त हो जायेंगा। (लेकिन) यह शीघ्र समाप्त नहीं हुआ। एक घन्टे तक , घर पर , उद्यान में , पहाड़ी पर , अनाज के खेत में , सारी घाटी में , ओलावृष्टि होती रही। वह खेत ऐसा सफ़ेद हो गया , जैसे नमक से ढका हो।
वृक्षों पर एक भी पत्ता शेष नहीं रहा। फसल को पूर्णतया नष्ट कर दिया गया था। पौधों से फूल जा चुके थे।
लेन्चो की आत्मा दुःख से भर गयी थी (अर्थात उसे अत्यधिक दुःख हुआ) जब तूफान गुजर चूका था , वह खेत के मध्य में खड़ा हो गया तथा अपने पुत्रों से कहा , “टिड्डियो का एक समूह भी इससे अधिक छोड़ देता ” (अर्थात इतना नुकसान नहीं करता।) ओलों ने तो कुछ नहीं छोड़ा है। इस वर्ष हमारे पास कोई अनाज नहीं होगा।
वह एक दुःखभरी रात्री थी।
हमारा सारा कार्य व्यवर्थ रहा।
कोई नहीं है जो हमारी सहायता कर सकता है।
हम सब इस वर्ष भूखे रहेंगे।
But in the . . .. . . . . . . . . a signature : god.
 हिंदी में अनुवाद : लेकिन उन सभी के ह्रदय में जो घाटी के मध्य में उस अकेले घर में रहते थे , एक एकल आशा थी : परमात्मा से सहायता।
इतने परेशान न हो , भले ही यह एक पूर्ण नुकसान प्रतीत होता है। याद रखो , भूख से कोई भी नहीं मरता है।
लोग यही कहते है : भूख से कोई भी नहीं मरता है।
पूरी रात के दौरान , लेंचो ने केवल अपनी एक आशा के बारे में सोचा : परमात्मा की सहायता जिसकी आँखें , जैसा कि उसे बताया गया था , प्रत्येक चीज देखती है , यहाँ तक कि एक व्यक्ति के अन्त: करण की गहनता तक भी। लेन्चो एक व्यक्ति का बैल था , खेतों में एक पशु की भांति कार्य करता रहता लेकिन फिर भी वह जानता था कि लिखा कैसे जाता है। आने वाले रविवार को , दिन निकलने पर , उसने एक पत्र लिखना आरम्भ कर दिया जिसे वह स्वयं कस्बें तक ले जायेगा तथा डाक में डाल देगा। यह परमात्मा को एक पत्र से कम नही था।
हे ईश्वर , उसने लिखा “यदि आप मेरी सहायता नहीं करते है , तो मेरा परिवार तथा मैं इस वर्ष भूखे मर जायेंगे। मुझे एक सौ पेसोज की आवश्यकता है ताकि मेरे खेत में पुनः बीज बो सकू एवं जब तक फसल न आ जाए तब तक जी सकूँ , क्योंकि ओलों ने।  . . . . . . . . . . . “
उसने लिफाफे पर लिखा “परमात्मा को” पत्र के अन्दर डाला तथा अभी भी दुखी था , कस्बे में गया।
डाकघर में , उसने पत्र पर टिकट लगाया तथा इसे डाकबक्से में डाल दिया।
कार्मिकों में से एक जो एक डाकिया था तथा डाकघर में भी सहायता करता था , अत्यधिक हँसते हुए अपने बॉक्स के पास गया तथा उसे परमात्मा का पत्र दिखाया। डाकिये के रूप में अपने करियर में उसने वह पता कभी नहीं जाना था। डाकपाल – एक मोटा , मिलनसार व्यक्ति था – ने भी अचानक हँसना आरम्भ कर दिया लेकिन लगभग तुरंत वह गंभीर हो गया तथा पत्र को अपनी डेस्क अर्थात मेज पर थपथपाते हुए , टिप्पणी की , क्या विश्वास है , काश , मेरे पास इस व्यक्ति , जिसने यह पत्र लिखा था , जैसा विश्वास होता। परमात्मा से पत्र व्यवहार आरम्भ करने का।
अत: लेखक के परमात्मा में विश्वास को न हिलने देने के लिए , डाकपाल को एक विचार ध्यान में आया : पत्र का उत्तर दिया जाए परन्तु जब उसने इसे खोला तो यह स्पष्ट था कि इसका उत्तर देने के लिए उसे शुभकामना , स्याही और कागज के अतिरिक्त कुछ तथा अधिक भी चाहिए था। लेकिन वह अपने निश्चय पर अटल था : उसने अपने कार्मिकों से धन राशि माँगना आरम्भ कर दिया , उसने स्वयं ने भी अपने वेतन का एक भाग दिया तथा उसके बहुत से मित्र भी दयालुता के कार्य के लिए कुछ न कुछ देने को बाध्य हुए थे।
उसके लिए एक साथ एक सौ पेसोज एकत्रित करना असंभव था , अत: वह उस किसान को आधे से कुछ अधिक (पेसोज) ही भेजने में समर्थ था। उसने धन राशि को उस लिफाफे में रखा जिस पर लेन्चो का पता लिखा था तथा इसके साथ एक पत्र जिस पर केवल एक शब्द हस्ताक्षर के रूप में समाविष्ट था : परमात्मा।
the following sunday . . . . . . . .. . . . . . .. . of crooks , lencho. 
पैराग्राफ का हिन्दी में अनुवाद : अगले रविवार को लेंचो सामान्य से कुछ पहले यह पूछने आ गया कि क्या उसके लिए कोई पत्र था .यह डाकिया स्वयं था जिसने उसे पत्र सौंपा जबकि डाकपाल , एक ऐसे व्यक्ति की संतुष्टि का अनुभव करते हुए जिसने एक अच्छा कार्य किया हो , अपने कार्यलय से देखता रहा।
लेन्चो ने धन राशि को देखकर हल्का सा भी आश्चर्य नहीं दिखाया ; उसका आत्मविश्वास ऐसा था –
लेकिन जब उसने धन राशि को गिना तो वह क्रोधित हो गया। परमात्मा गलती नहीं कर सकता था , न ही वह लेंचो को इन्कार कर सकता था जिसकी उसने विनती की थी।
तुरंत ही , लेंचो स्याही और कागज माँगने के लिए खिड़की तक गया। सार्वजनिक लेखन मेज पर उसने लिखना आरम्भ किया , अपनी भौहों की बहुत सलवटों के साथ (अर्थात त्यौरियाँ चढ़ाकर) जो उस प्रयास द्वारा उत्पन्न हुई थी जो उसे अपने विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए बनानी पड़ी थी। जब उसने समाप्त कर लिया था , वह खिड़की पर टिकट खरीदने गया जिसे उसने थूक लगाया एवं फिर अपनी मुट्ठी के प्रहार से लिफाफे पर चिपका दिया। जिस क्षण पत्र डाक बॉक्स में गिरा डाकपाल इसे खोलने गया। इसमें लिखा था :
हे परमात्मा : जो धनराशि मैंने माँगी थी उसमें से केवल 70 पेसोज मुझ तक पहुँचे , शेष भी मुझे भेजें , क्योंकि मुझे इसकी अत्यधिक आवश्यकता है लेकिन इसे मुझे डाक द्वारा न भेजें क्योंकि डाक घर के कार्मिक बेईमानों का एक गुच्छा (समूह) है। लेन्चो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *